Friday, May 13, 2016


No Inbox Please..

उनके ओर से - हाय पगली...

मैं – हाय, पूरे दिन कहाँ थे.?

उनके ओर से – बस काम में लगा था, तुम सुनाओ पूरे दिन क्या खिचड़ी पकी?

मैं – कुछ नहीं बस एक दो पोस्ट की, एक पोस्ट बारिश पर भी की थी, पोस्ट करने के बाद जो दो लाइन जोड़ी थी बहुत फन्नी लगी मुझे, तुम्हे कैसी लगी..

उनके ओर से – अच्छी लगी, एकदम रस में डूबी हुई, मोहब्बत Subject तुमने अच्छा पकड़ा है। लेकिन देखो ज्यादा राजनीति वाली पोस्ट मत किया करो, अगर तुम्हें लगे कि पोस्ट करना जरुरी है तो मुझे कह दिया करो मैं कर दूँगा तुम शेयर कर लेना!

मैं – ठीक है, ------ अच्छा ये बताओ, मैंने आज कौन सी मोहब्बत वाली पोस्ट कर दी.?

उनके ओर से – मुझे ठीक से याद नहीं आ रहा, रुको मैं देख कर बताता हूँ।

मैं – अरे सुनों, अब देखने के बहाने गायब ना हुओ, मैं कोई मोहब्बत वाली पोस्ट नहीं की थी..

उनके ओर से – हम्म्म्म

मैं – और सुनाओ

उनके ओर से – क्या सुनाऊँ, ----- कल सुबह मिलते हैं। मैं तुम्हारे लिए (ऍर्त्रश्रक्षश्रःक्ष) लेते आऊँगा।

मैं (खुश होते हुए) – तो पक्का न कल आओगे, आपको पता है.. जब आप इनबॉक्स का जवाब नहीं देते तो मुझे बहुत गुस्सा आता है..

उनके ओर से – अरे पगली, जब भी समय मिलता है जवाब तो देता हूँ न।
(इसी बीच उन्हें पता चला कि मैं इनबॉक्स में कुछ और लोगों से भी बात कर रही हूँ)
उनके ओर से – देखो मैंने तुम्हें पहले भी कहा है कि किसी से चैट मत किया करो, जो भी बात हो पोस्ट पर ही कर लिया करो, इतना समझाने के बाद भी तुम क्यों नहीं मानती..

मैं – गुस्सा क्यों हो रहे हो, चैट ही कर रही थी, चोरी थोड़े ही कर रही थी.. फिर पप्पा तो चेक करते ही हैं.. कुछ गलत बात थोड़े ही करती हूँ..

उनके ओर से – किसने कहा तुम्हें कि पप्पा तुम्हारे अकाऊँट चेक करते हैं?

मैं – मैं खुद उन्हें देती हूँ चेक करने के लिए..

उनके ओर से – तुम सच में एकदम पागल हो। खैर छोड़ो लेकिन एक बात ध्यान कर लो इनबॉक्स चैट मत करना किसी से।

मैं – फिर तुमसे कैसे बात करुँगी..

उनके ओर से – ओह, मतलब मुझे और परिवार के लोगों से तो बात कर सकती हो।

मैं – क्यों क्या हो जाएगा अगर दूसरों से भी बात कर लूँ.. दिन भर इनबॉक्स की ट्रींग-ट्रींग चलती रहती है, मुझसे इग्नोर नहीं किया जाता..

उनके ओर से – देखो, इनबॉक्स में बात करने से मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन दूसरे गलत मतलब निकालने लग जाते हैं।

मैं – दूसरे कौन..

उनके ओर से – जिनसे तुम बात कर रही होती हो।

मैं – सब तो अच्छे से बात करते हैं.. जब कोई उल्टा सीधा कहता है तो उसे ब्लॉक भी कर देती हूँ, फिर क्या परेशानी है..

उनके ओर से – कुछ परेशानी नहीं है, जो दिल में आए करो।

मैं – अरे सुनो.. बताओ न.. क्या होगा अगर मैं इनबॉक्स में किसी और से बात करूँ.. किसी और से चैट करूँ..

उनके ओर से – कुछ नहीं होगा, और कहा न जो दिल में आए करो... मैं मना तो नहीं कर रहा। कोई मसला हो जाए तो बता देना मैं देख लूँगा। अच्छा अब सो जाओ कल मिलते हैं।

थोड़ी देर तक मैं भी फुर्सत से एक फेसबुक मित्र से चैट करती रही.. 
रात काफी हो चुकी थी और मुझे नींद नहीं आ रही थी दिल नहीं लगा तो मैं उन्हें फ़ोन कर ली.. वो बोले सोने दो न कल बात करेंगे, लेकिन मैं कहाँ मानने वाली थी.. कभी-कभी तो छेड़ने का दिल करता है और रात उसी मस्ती में थी मैं..

मैं उनसे उलझ कर अजीब सा सुकुन पाती हूँ। उनसे उलझने में बड़ा अपनापन सा लगता है, लगता है कि रिश्ते में जान बाकी है... 

फिर मैं तो थी तंग करने के मूड में बोल पड़ी – तुम तो बहुत जल्दी नाराज़ हो जाते हो.. मैं बोल तो रही हूँ न कि मुझे चैट से होने वाले नुकसान पर लेक्चर सुना दो.. 

वो बोले – मुझे लड़कियों के इनबॉक्स के बारे में नहीं मालूम, लेकिन जितने भी फिमेल आई डी हैं सब कहते हैं कि इनबॉक्स में होने वाली बातों का स्तर ज्यादातर घटिया होता है, छुप के बात करने वालों मन साफ़ नहीं होते। जो कहना है खुले मंच पर कहो। और थोड़ी बहुत बात करने से कुछ हर्ज नहीं है। वो तो होते ही रहना चाहिए। 

मैं बोली – मैं सब जानती हूँ, कभी कभार को छोड़कर सब अच्छे ही मैसेज आते हैं। कुछ बहुत अच्छे लोग हैं जो बहुत अच्छी-अच्छी बातें बताते हैं, कुछ जी-के वि-के की भी बात होती रहती है, मुझे तो बहुत अच्छा लगता है.. 

वो बोले - हाँ तुम्हें तो सिर्फ खुद की पड़ी रहती है.. मैं बोली – खुद की पड़ी रहती तो इतनी रात गए आपसे फ़ोन पर बात नहीं करती, मुझे लगा आप नाराज़ हो गए हो.. तो मनाने के लिए फ़ोन कर ली.. लेकिन आपको मेरी फिक्र रहे तब तो.. जब देखो दुनियादारी पर एक लेक्चर सजा के बैठे रहते हो.. सीधे-सीधे क्यों नहीं कहते..(और मैं रुक गई) 

वो बोले – क्या नहीं कहता सीधे-सीधे???

मैं चुप्प, पता था अब तो ये सारी रात बात करेंगे.. क्योंकि एक अधुरी बात कई ग्रंथों में भी पूरी करने की कोशिश कर लीजिए लेकिन फिर भी कुछ न कुछ बाकि रह ही जाएगी...

तुम जो मिल गए हो..
तो ये लगता है...
दो जहां... मिल गया...

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