भारत मोदी जी के काल में ही विश्वगुरु बनेगा
भारत मोदी जी के काल में ही
विश्वगुरु बनेगा. पूछिए कैसे? सारे लक्षण उन्हीं में मौजूद हैं. दूसरा कोई यह काम कर नहीं कर सकता.
मोदी जी ने 1983 में दूरस्थ शिक्षा के तहत M. A. किया. उसके बाद भारतीय गणतंत्र ने उनसे प्रेरणा लेकर 1983 में दूरस्थ शिक्षा यानी Distance Learning Distance Learning की शुरुआत की. देश में Distance Learning शुरू नहीं
हुई थी, तब तक वे इसके तहत M. A. कर
चुके थे. वेकैंया नायडू बता ही चुके हैं कि नरेंद्र मोदी विष्णु के अवतार हैं.
विष्णु भगवान की लीला अपरंपार है. इसीलिए मोदी जी दो बार पैदा हुए. पहले सन 49 में उसके बाद 50 में. पैदा क्या हुए होंगे, अवतार लिया होगा.
मोदी जी ने B.A. वगैरह नहीं किया, सीधे M.
A. किया. उसके पहले मालगाड़ी के डब्बे में चाय बेचते थे. गायें
भैंसें और चीनी आलू के बोरे सब खूब चाय पीते थे.
हाल ही में छपी एक किताब के
मुताबिक, बाल नरेंद्र ने मगरमच्छ के मुंह
से गेंद छीन ली थी. खेलने के लिए एक मगरमच्छ भी पकड़ लाए थे और मगरमच्छ की पीठ पर
बैठकर तालाब के बीचोबीच तिरंगा फहरा दिया था.
यह सब वैसे ही है जैसे मोदी जी
तक्षशिला को पाकिस्तान से उठाकर बिहार में रख देते हैं.
नरेंद्र मोदी जी ने लीला के मामले
में भगवान कृष्ण को पीछे छोड़ दिया है.
ऐसे चिल्लर टाइप मसलों पर उलझकर
यह देश विश्वगुरु बनेगा. जिस देश में चुनाव लड़ने के लिए कोई डिग्री या शैक्षिक
योग्यता निर्धारित नहीं है, जिस देश में अभी करोड़ों लोग अनपढ़ हैं, उस देश का
पीएम अपनी डिग्री को लेकर रहस्य बनाए हुए है. यही तो भगवान की लीला है.
मेरे
हिसाब से अगर वे अनपढ़ हैं, या बहुत कम पढ़े हैं तो यह कोई शर्म की बात
नहीं है. यह तारीफ की बात है, लेकिन हीनताबोध का क्या किया
जाए? भारतीयों की नस नस में भरा है.

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