-बाजार
व्यवस्था और स्त्री-
दिग्गी... से कोई
लड़की इंप्रेस नहीं होती है।
वो बचपन से इस कोशिश
में लगा रहता कि कोई लड़की इंप्रेस हो जाए लेकिन ये सौभाग्य उसे प्राप्त नहीं हुआ!
इस कोशिश में उसने ना
जाने कितने ही लड़कियों से दोस्ती की स्कूल,
कॉलेज, गाँव मोहल्ले हर जगह ट्राई कर लिया
यहाँ तक की लड़की को इंप्रेष करने के लिए उसने शादी तक कर ली लेकिन उसकी दाल यहाँ
भी नहीं गली!
अपनी ही मिसेस ना पटे
ऐसा तो कहीं हुआ नहीं.. लेकिन दिग्गी.. की तो किस्मत ही खराब थी, उसकी बीबी रोज उसे
ताने मारती कहती "कम से कम एक बार तो मुझे पटा लीजिए" लेकिन दिग्गी.. के
लाख कोशिश करने के बाद भी वो किसी लड़की को इंप्रेस नहीं कर पाए!
पता है क्यों?
क्योंकि दिग्गी.. कभी..
क्लोजअप (अरे वही दमकती साँसों वाला जिसके मंजन करने के बाद फूँक मारते ही - लड़की
तो गई समझो), हाँ तो वो 'क्लोजअप' नहीं लगाते थे।
ऐसे विज्ञापन वाले
उदाहरण आपको हिन्दू देवी-देवताओं के गिनती [33,00,00,000] जितने मिल जाएँगे या शायद उससे भी ज्यादा..
लेकिन क्या सच में
ऐसा होता है?
क्यों कोई मानवाधिकार
के बड़े लड़ाके इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाते?
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Riya




















