Monday, June 13, 2016

कैराना A deception

आतंकवादी मीडिया ने कैराना को इतना बदनाम कर दिया है कि सबकुछ जानते हुए भी एकबार खुद कैराना जाकर हालात का जायजा लेने से खुद को नहीं रोक पायावहाँ जाकर जो देखा सुना वो यहाँ साझा कर रहा हूं.

2013 के दंगे की मार अभी तक झेल रही है

कैराना में घुसने से पहले ही भूरा रोड पर खेतों के बीच झुग्गियों में पड़े पांच सौ मुस्लिम परिवार दिखे, 2013 के दंगो के बाद से ये लोग बिना शिक्षा और चिकित्सा सुविधा के बद से बदतर हालात में जिंदगी गुजारने को मजबूर है.. 2013 से ही कभी गर्मियों में 48 डिग्री तापमान के साथ सूरज इन्हे झुलसा रहा है.. कभी आंधी इनकी झुग्गियों को उड़ा ले जाती है..

कभी बारिश भरी रात छोटे छोटे नौनिहालों के साथ भीग भीगकर गुजारनी पड़ती है.. तो कभी पारे के 2 डिग्री से भी नीचे आने के कारण दूधमूहे बच्चों और बुजुर्गों को पाला असमय मौत दे जाता है..

इस ईलाके में कम से कम पन्द्रह और ऐसे ही दंगाईयो से खौफ़जदा विस्थापितो की बस्तियाँ इसी तरह इंसानी जिंदगियों का सहारा बनी हुई हैं।

खैर इनकी छोड़ो, बात करते हैं असल मुद्दे की, यानी कैराना से भाजपा प्रायोजित तथाकथित पलायन की.. इसी सिलसिले में सबसे पहले मुलाकात हुई भाजपा द्वारा पलायन करने वालो की जारी लिस्ट में सबसे पहला स्थान पाने वाले कोल्ड ड्रिंक व्यापारी ईश्वर चंद उर्फ बिल्लू जी की.. ईश्वर चंद उर्फ बिल्लू जी से बात करने पर बिल्लू जी ने ऑन कैमरा बताया की 16 अगस्त 2014 की रात में पांच छः बदमाश उनके घर आये और उनसे बीस लाख रुपये की रंगदारी नहीं देने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी देकर चले गये.. उसके बाद अगले तीन दिनों तक उन्होंने स्थानीय भाजपा नेताओं सहित मदद के लिए हर मुमकिन दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन कहीं से भी संतुष्टि नहीं मिलने पर मजबूर होकर 19 अगस्त की रात उन्होंने परिवार सहित कैराना से पलायन कर दिया.. उनके पलायन के पीछे हिन्दू मुस्लिम नफरत जैसे किसी कारण को पूछने पर उन्होंने ऐसी किसी भी बात से इंकार करते हुए बताया कि उनके यहाँ काम करने वाले छब्बीस कर्मचरियों में से बाईस कर्मचारी मुसलमान ही थे और आज भी यहाँ उनके बचे खुचे कारोबार और सम्पत्ति की देखभाल के लिए एकमात्र मुस्लिम नौकर ही है।

16 अगस्त 2014 की रात में पांच छः बदमाश उनके घर आए और
उनसे बीस लाख रुपये की रंगदारी नहीं देने पर परिवार सहित जान
से मार देने की धमकी देकर चले गए
16 अगस्त 2014 की रात में पांच छः बदमाश उनके घर आये और उनसे बीस लाख रुपये की रंगदारी नहीं देने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी देकर चले गये..
फिर जारी लिस्ट में 33 नंबर पर मौजूद अनिल जैन जी से बात हुई.. उन्होने बताया कि वो चार साल पहले ही अपना कारोबार शामली मन्डी में होने के कारण शामली आ गये थे और गगन विहार शामली में आलिशान कोठी बनाकर आराम से रह रहे हैं.. लिस्ट में मौजूद डॉ मनोज के भाई कमल ने बताया कि उनके भाई ने गुजरात में फैक्ट्री लगाई हुई है.. वो इसलिए गुजरात चले गये और वो यहाँ कैराना में ही आराम से मेडिकल स्टोर चला रहे हैं..

पलायन करने वाले 341 लोगों की लिस्ट में 231 और 232 नंबर पर मौजूद सुबोध जैन एडवोकेट और सुशील एडवोकेट की क्रमशः सात साल और पन्द्रह साल पहले ही हत्या हो चुकी है.. जिनमे एक सुबोध जैन की हत्या के आरोपी अमित विश्वकर्मा आदी हिन्दू ही जेल गये थे और एक की हत्या में सांसद हुक्म सिंह के नजदीकी उनके सजातीय दबंग का नाम पुलिस ने मुकदमे से निकाल दिया था.. क्योंकि उस वक्त हुकुम सिंह प्रदेश की भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री के बाद दूसरा स्थान रखते थे

ऐसे ही 341 लोगों (ना की परिवारों की) की लिस्ट में अधिकतर लोग कोई बीस साल पहले तो कोई पन्द्रह साल पहले किसी ना किसी कारोबारी सिलसिले के चलते दिल्ली नोएडा जैसी जगहों पर शिफ्ट हो चुके हैं.. मूला पंसारी और एक दो परिवार जरूर मुकीम काला गैंग के रंगदारी मांगने पर कैराना से सैंकडो मुस्लिम परिवारों के साथ पलायन कर गये हैं.. नाम उजागर नाम करने की शर्त पर तीन मुस्लिम परिवार ऐसे भी मिले जिन्होंने गैंग के लोगों को दस दस और बीस बीस लाख रंगदारी के देकर अपनी जान बचाई थी (मुकीम और गैंग अब जेल में है).. अब बात करते हैं मुकीम गैंग द्वारा कैराना में अंजाम दी गई घटनाओं की.. तो थाने से पता चला की मुकीम गैंग ने कैराना क्षेत्र में छः हत्याएं की है जिनमे व्यापारी राजू और उसके भाई सहित दो हिन्दू और कल्लू.. काला खुरगान निवासी दोनो सगे भाई.. एक जन्धेडी निवासी और फुरकान उर्फ काला निवासी बलवा सहित चार मुसलमानों की हत्या की है।

इस घर को हिंदू विस्थापितों का घर
दिखाकर सहानुभूति बटोरी जा रही
है जबकि ये घर एक मुस्लिम
मौहम्मद जमा का निकला
इस घर को हिन्दू विस्थापितों का घर दिखाकर सहानभूति बटोरी जा रही है जबकि ये घर एक मुस्लिम मौहम्मद जमा का निकला
फिर थाने जाकर वर्ष 2014 का रिकॉर्ड देखने पर पता चला की उस साल वहाँ हत्याओं के कुल 22 अभियोग पंजीकृत हुए थे.. जिनकी हत्या के आरोपी राजेन्द्र शिवकुमार बन्धुओं के मुस्लिम मुकीम काला आदि है.. विनोद की हत्या में फुरकान, अमित हिन्दू-मुस्लिम दोनों है.. राजेन्द्र की हत्या में रविन्द्र हिन्दू है.. सचिन की हत्या में सपट्टर हिन्दू आरोपी है.. उपरोक्त पांच के आलावा बाकी सभी हत्याएं मुस्लिमों की ही हुई है.. जिनमे वासिल की हत्या के लिए परवेज.. मुरसलीन और एक अन्य की हत्या में उसकी पत्नी.. जाबिर की हत्या में इसरार.. सालिम की हत्या में अज्ञात.. वकील की हत्या में सलमान.. शहजाद की हत्या में हाशिम आदी.. नईम की हत्या में जनाब.. मजाहिर की हत्या में मोहसिन आदि.. सालिम की हत्या में कासिम आदि.. अजीमा की हत्या में शमशाद.. शीबा और रिजवाना की हत्या में शमीम आदि.. तालिब की हत्या में रुकमदीन आदि आरोपी है….

बाकी 341 लोगों की लिस्ट ध्यान से देखने पर पता चलता है कि वो कुल पन्द्रह बीस परिवारों के ही सदस्य है ना की 341 परिवार हैं.. इसके अलावा डेढ़ लाख से अधिक आबादी वाले ऐतिहासिक नगर कैराना में एक भी महिला MBBS डॉ• नहीं है.. अधिकतर डिलिवरी के मामलों में लोगों को पानीपत या शामली दौड़ना पड़ता है.. अच्छी शिक्षा के लिए हजारों बच्चे रोजाना शामली या दूसरे प्रदेश हरियाणा के पानिपत शहर में पढ़ने जाते हैं.. अच्छे रेस्तरां अच्छे थियेटर में फिल्म देखने या स्तरीय शांपिग जैसी बात तो कैराना में बहुत दूर की कौड़ी है ही..

अब मेरा सवाल है कि कैराना से सात बार के विधायक प्रदेश सरकार में कई बार पांच पांच छः छः मंत्रालय अपने पास रखने वाले भाजपा के सांसद महोदय हुकूम सिंह जी से कि जब उन्होंने पिछले चालिस सालों में कैराना के लिए इतना भी नहीं किया कि वो अपने खुद के परिवार को भी कैराना में रख सकें तो आम साधन सम्पन्न हिन्दू या मुसलमान कैराना में आखिर क्यों रहे?

















 – लेखक मुस्लिम टूडे मैग्जीन के सहसंपादक हैं।

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