एक था रामवृक्ष यादव (भगवान
उनकी आत्मा को शांति दे).. नाम तो सुना होगा आपने.? मथुरा का विरप्पन.. कहते हैं अगर वो गलती से भी शासन में शामिल हो जाता
तो लोग हिटलर को भूल जाते.. आपको पता है कैसे बनी उसकी फ़ौज.? हम बताते हैं..
बंदे का एकदम जलेबी की तरह सीधा रूल्स था.. पहले
तो अपने राज़ (After securing power) आने पर वो
बिस्कुट के दाम पर सोना दिलवा देने जैसा ब्रह्म वरदान टाइप लालच चेलों के दिमाग़
में डालते थे.. और जो बंदा एक बार फंस जाए तो फिर लग जाओ भाई काम पर.. लेकिन
छुट्टी न मिलेगी.. अगर छुट्टी चाहिए तो दो जमानती लेकर आओ.. आदमी भुन्नाया कहीं से
न कहीं से एक आध अपने जैसा खोज के लाकर धर देता रामवृक्ष के सामने.. और रामवृक्ष
साब सबसे पहले उस जमानती के दिमाग़ में भी अपना वायरस डालते ऐसे ऐसे सपने दिखाते कि बंदा सिधार जाता और भक्त
रामवृक्ष बनकर परलोक से लौटता था..
उसकी सबसे बड़ी उपलब्धी थी उसका बैच.. आज़ाद हिन्द
फ़ौज का वॉलेंटियर होना उसपर विश्वास करने के लिए मजबूर कर देता था लोगों को..
बहुत बड़ी सैना थी जनाब अपने जमाने में.. जिसको तोप कहते हैं हम आजकल उस तोप से भी
बड़ी सैना थी आज़ाद हिन्द फ़ौज.. आधी दुनिया को कब्जाने वाले अंग्रेज भी थरथरा गए
थे उनसे.. अब ऐसे सैना के जवान से भला कोई क्यों इम्प्रेस हो.?
:-
ये निम्न बातें हैं जो रामवृक्ष के #तोप होने का सबूत है..
अखिलेश सरकार को सब पता था, मथुरा के लिए 80 बार चेताया अफसरों ने, कुछ नहीं किया..
जवाहरबाग रामवृक्ष के नाम पट्टा होने में सिर्फ
दो महीने रह गए थे..
रामवृक्ष जिंदा होता तो मुलायम फैमिली फंस जाती, साजिशन मरवाया गया..
‘वकील दिल्लीवाले’ पर रामवृक्ष ने किया सबसे ज्यादा पैसा खर्च..
SP मुकुल द्विवेदी के सिर पर पड़ा
डंडा, तो मैदान छोड़ भागे पुलिसवाले..
मथुरा का ‘मुजरिम’,
जिसके गुरु कानपुर में चप्पलियाए गए थे..
रामवृक्ष यादव के गुंडों ने SP-SHO
को मार डाला, कुल 22 की मौत..

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