हैदराबाद (पाकिस्तान) से
‘कयामत बानो’ की रिपोर्ट
सरकार और दालों के किमतां इत्ते बढ़े हुए हैं कि गऱीब लोगां कू एक वखत सालन बनाने कू भी सौ वखत सोचना पड़ रा.. पेश है महँगाई पर एक रिपोर्ट – पाक के प्राइममनिस्टर शरीफ़ मियां बाहिर मुल्कां के दौरे करके पाकिस्तान कू वापिस आ गए.. सेल्फियां में तीनों अलग-अलग मुल्कां के अलग-अलग डिसों से मज़े उड़ाते दिखे.. लोगां हैरान है कि ‘पी एम मां’ को क्या सूझ री है कि आते जा रए जाते जा रए.. चुनाव के दिनां में “अच्छे दिनां आने वाले हैं!” करके लोगां कू बोले थे.. असल में हम छोले हैं जो उनका मतलब नक्को समझे.. अच्छे दिनां उनके खुद आने वाले हैं करके बोले थे.. हम इसे अपने अच्छे दिन सोच रए थे.. अच्छे दिनां आना तो दूर की बात पहले वाले दिन ही आ जाएँ तो अच्छा है.. मालूम नक्को शरीफ़ मियां को बाहर के लोगां क्या-क्या खिलाए.. हम गरीबां को तो घर की बनी हरी मिर्ची की चटनी और ज्वार के रोटियां खाने कू भी नसीब़ नक्को हो रई.. हरी मिर्चियां भी बोले तो 100 रुपया से कम कू नक्को मिल रए.. कम से कम टमाटर की चटनी खा ले के तसल्ली करते, मगर टमाटरां भी सौ रुपिया किल्लो से मिल रए.. “दाल रोटी खाओ प्रभू के गुण गाओ” बोल ले के अपने दिल को मना लेंगे बोले तो दालां भी कौन से सस्ते हैं.? दालां भी 80 रुपय से लेकर 200 रुपय तक के हो गएले हैं.. हमारे रियासत में गनिमत है चावलां 1 रुपय किल्लो से मिल रए हैं.. नमक 10 रुपय किल्लो से मिल रा.. मगर पब्लिक को क्या करना. खाली खाना और नमक खाना.? काए कू बोले तो सालनां तो खाब होते जा रए.. हरा मसाला खरिदेंगे बोले तो भी सोचना पड़ रा.. ये महँगाई के दिनां में काए को हरी-हरी सूझ रही.?
बरहाल ये महँगाई के दिनो में सालनां आम आदमी के कटोरों से दूर हो के अमीर लोगां के दस्तख्वानों पर चले गवे हैं.. गरीबां के हवा खाने के और आंसुआँ पिने के दिन आ गवे हैं..

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